रिवर्स स्विंग (Reverse Swing) क्रिकेट की दुनिया कि सबसे घातक और रोमांचक कला है। रिवर्स स्विंग बड़े से बड़े बल्लेबाज को चकमा दे सकती है। वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे गेंदबाजों का मुख्य हथियार गेंदबाजी की यही कला थी। इस कलात्मक गेंदबाजी के दम पर ही कई गेंदबाजों ने क्रिकेट की दुनिया में राज किया था।
जहाँ सामान्य स्विंग में गेंद चमकदार हिस्से की विपरीत दिशा में मुड़ती है, वहीं रिवर्स स्विंग की स्थिति में गेंद चमकदार हिस्से की तरफ ही मुड़ जाती है। इसके पीछे कोई जादू या कलाकारी नहीं, अपितु फिजिक्स और Aerodynamics काम करता है।
आसान भाषा में समझते है कि आखिर रिवर्स स्विंग के पीछे का विज्ञान (Science) क्या है। रिवर्स स्विंग को समझने से पहले सामान्य स्विंग को समझना जरुरी है।
सामान्य स्विंग (Conventional Swing)
जब गेंद (Ball) नई होती है, तो उसके दोनों हिस्से (सीम के दोनों तरफ वाले) चमकदार होते है। सामान्य तौर बॉलर गेंद की सीम (seam) को तिरछी पकड़ता है। जब गेंद गेंदबाज के हाथ से निकलने के बाद हवा में होती है, तो सीम से टकराने के बाद हवा दो भागों में बंट जाती है।
जिस तरफ सीम का झुकाव होता है, उस तरफ की हवा तेजी से निकलती है, परिणामस्वरूप गेंद दूसरी दिशा में चली जाती है।
परिभाषा-
जब गेंद नई होती है या चमकीली होती है तो गेंद हवा में तैरते (गेंदबाज के हाथ से निकलने के बाद) समय अपने चमकदार हिस्से (Shiny side) की विपरीत दिशा में मुड़ती है, तो उसे सामान्य स्विंग कहते है। मतलब अगर गेंद का चमकदार हिस्सा राइट साइड में है, तो गेंद लेफ्ट साइड की तरफ स्विंग होगी।
स्विंग होने का कारण-
सामान्य स्विंग की दशा में गेंदबाज गेंद की सिलाई को थोड़ा तिरछा पकड़ते हैं। जब बॉल हवा में आगे बढ़ती है, तो आने वाली हवा दो भागों में बंट जाती है। जिस तरफ गेंद की सीम का झुकाव होता हैं, उस तरफ की हवा तेज गति से पीछे की ओर निकल जाती है। इसलिए गेंद सीम की झुकाव वाली दिशा या चमकदार हिस्से की विपरीत दिशा में हवा में ही अपना रास्ता बदल लेती है।
रिवर्स स्विंग के पीछे का साइंस (The Science Behind Reverse Swing)
जैसे-जैसे क्रिकेट मैच आगे बढ़ता हैं,गेंद पुरानी होने लगती है। रिवर्स स्विंग का असली खेल यही से शुरू होता है। जब-जब गेंद फील्डर्स के पास जाती है तो, फील्डर्स गेंद के एक हिस्से को पसीने और जर्सी से रगड़कर चमकदार रखते हैं, ठीक इसके विपरीत गेंद के दूसरे हिस्से को खुरदरा ही रहने देते हैं।
जब गेंद एक तरफ से चमकदार और दूसरी तरफ से खुरदरी हो जाती है, तो यही से रिवर्स स्विंग के पीछे का साइंस काम करना शुरू हो जाता है।
जब गेंद को 130-140 प्रति/घंटा की रफ्तार से फेंका जाता है, तो हवा का प्रभाव बदल जाता है। यहाँ पर फिजिक्स के दो नियम काम करते है-
नियम 1- लेमिनार फ्लो (Laminar Flow)
नियम 2 – टर्बुलेंट फ्लो (Turbulent Flow)
हवा का बहाव (Air Flow)
चमकदार हिस्से की तरफ (Shiny Side)– चमकदार हिस्से की तरफ गेंद चिकनी होती है, इसलिए इससे टकराकर हवा बिना किसी रुकावट के बिलकुल सीधी और बिना हलचल के निकल जाती है। इसे विज्ञान (Science) में लेमिनार फ्लो (Laminar Flow) कहा जाता है।
खुरदरे हिस्से की तरफ हवा का बहाव (Rough Side)– गेंद की यह साइड खुरदरी होती है या ऊबड़-खाबड़ होती है। जब गेंद का यह हिस्सा हवा से टकराता है, तो गेंद में हलचल (Turbulent) होती है। इससे गेंद गड़बड़ा जाती है, इस क्रिया को Turbulent Flow के नाम से जाना जाता है।
प्रेशर का अंतर (Boundary Layer Sepration)
यह सामान्य सी बात है कि खुरदरे हिस्से की तरफ जो गड़बड़ाई हुई हवा होती है, वह गेंद को ज्यादा देर तक जकड़कर रखती है और देर से छूटती है। ठीक इसके विपरीत चमकदार हिस्से वाली साइड से गेंद बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ जाती है। अथवा हवा गेंद की इस सतह को बहुत जल्दी छोड़ देती है।
परिणामस्वरूप गेंद के चमकदार हिस्से की तरफ एक लो-प्रेशर जोन बन जाता है। फिजिक्स के नियम के अनुसार गेंद हाई-प्रेशर से लो-प्रेशर की तरफ खिंची चली जाती है। चूंकि लो-प्रेशर गेंद के चमकदार हिस्से की तरफ बना होता है, इसलिए गेंद अचानक चमकदार हिस्से की तरफ ही स्विंग हो जाती हैं, इसे क्रिकेट की भाषा में रिवर्स स्विंग के नाम से जाना जाता है।
रिवर्स स्विंग के लिए जरुरी शर्तें (Conditions Required)
गेंदबाज के लिए हर परिस्थिति में गेंद को रिवर्स स्विंग करवाना संभव नहीं होता है, इसके लिए कुछ खास परिस्थिति या शर्तों का होना जरुरी है-
बॉल की गति (Speed)
गेंद (Ball) को रिवर्स स्विंग करवाने के लिए गेंदबाजी की गति 135-140 किमी/घंटा या उससे भी ज्यादा होनी चाहिए, अधिक गति की वजह से हवा का प्रेशर अच्छी तरह से काम करता है जबकि गेंद की गति कम होने की दशा में गेंद की रिवर्स स्विंग करवाना संभव नहीं है।
पिच (Pitch)
कोई भी गेंद रिवर्स स्विंग होगी या नहीं यह पिच की नमी और फील्ड पर मौजूद घास पर निर्भर करता है। रिवर्स स्विंग के लिए सूखा पिच और आउटफील्ड भी सूखा होना चाहिए। अगर मैदान गीला होगा या आउटफील्ड हरा होगा तो, गेंद का खुरदरा वाला हिस्सा भी गीला या सॉफ्ट हो जाएगा, जिसके कारण रिवर्स स्विंग नहीं होगी।
भारत और पाकिस्तान जैसे देशों पिच और मैदान रिवर्स स्विंग के सबसे परफेक्ट होते है। वसीम अकरम, वकार यूनिस रिवर्स स्विंग के बादशाह थे।
गेंद की आयु (Ball Age)
गेंद जितनी ज्यादा पुरानी होती है, उसके रिवर्स होने के चांस भी उतने ही अधिक होते है। 40 ओवर या अधिक पुरानी गेंद रिवर्स स्विंग के लिए सबसे आदर्श मानी जाती है।
रिवर्स स्विंग खतरनाक क्यों?
सामान्य स्विंग हवा में जल्दी दिखाई देने लगती है, जबकि रिवर्स स्विंग बैट्समैन के बेहद करीब आने के बाद (पिच पर ठप्पा खाने से ठीक पहले या बाद) मुड़ती या घूमती हैं। लेट स्विंग होने की वजह से बल्लेबाज यह तय नहीं कर पाता कि गेंद किस तरफ और कब मुड़ेगी। बैट्समैन को डिसीजन (Decesion) लेने का समय नहीं मिलता है। इस वजह से रिवर्स स्विंग को बेहद खतरनाक बॉल माना जाता है।
गेंदबाज गेंद अक्सर गेंद को बाहर की तरफ रिलीज करता है, लेकिन रिवर्स स्विंग के कारण वह अचानक अंदर की ओर आ जाती है, जिससे बैट्समैन के एलबीडब्लू (Leg Before Wicket) या क्लीन बोल्ड होने का खतरा बढ़ जाता है।
रिवर्स स्विंग का इतिहास और महान गेंदबाज
इस तरह की गेंद की खोज का श्रेय पाकिस्तान के गेंदबाजों को जाता है, जिन्होंने रिवर्स स्विंग से दुनिया को रूबरू करवाया। सबसे पहले पाकिस्तान के सरफराज नवाज ने इसकी शुरुआत की थी। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज गेंदबाज इमरान खान ने भी रिवर्स स्विंग को आगे बढ़ाया।
पाकिस्तान के ही दो पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनिस और वसीम अकरम की जोड़ी ने रिवर्स स्विंग को एक मुकाम तक पहुंचा दिया।
वकार यूनिस की तेज रफ्तार और आग उगलती गेंद को खेलना बैट्समैन के लिए बहुत मुश्किल था। लेकिन इससे भी जबरदस्त थी वकार की तेज रफ़्तार वाली यॉर्कर रिवर्स स्विंग, जिसका किसी के पास कोई जवाब नहीं था।
अगर भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो ज़हीर खान, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह भी इस कला में माहिर है।
Kashmiri Willow Bat क्या है? पहचान और खरीदारी गाइड
सवाल-जवाब
रिवर्स स्विंग और सामान्य स्विंग में क्या अंतर है?
जवाब- सामान्य स्विंग में नई गेंद हमेशा अपने चमकदार हिस्से की विपरीत दिशा में मुड़ती है, जबकि रिवर्स की दशा में पुरानी गेंद हवा के दबाव की वजह से चमकदार हिस्से की तरफ ही मुड़ जाती है।
क्या रिवर्स स्विंग के लिए गेंद का पुरानी होना जरुरी है?
जवाब– हाँ, रिवर्स के लिए गेंद कम से कम 40 ओवर्स पुरानी होनी चाहिए, गेंद का एक हिस्सा चमकदार और दूसरा खुरदरा होना जरुरी है।
रिवर्स स्विंग में गेंद की स्पीड का क्या रोल है?
जवाब– गेंद की गति कम से कम 135 किमी/घंटे या उससे अधिक होनी चाहिए।
रिवर्स स्विंग की खोज किसने की?
जवाब– Reverse Swing की खोज का श्रेय पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सरफराज नवाज को जाता है।
रिवर्स स्विंग के लिए पिच या मैदान का सूखा होना जरुरी है?
जवाब– हाँ, अगर मैदान या पिच सूखा नहीं हुआ तो गेंद का खुरदरा हिस्सा भी सॉफ्ट हो जाएगा और गेंद स्विंग नहीं होगी।