सर जैक हॉब्स के क्रिकेट आंकड़े उनकी महानता के सबूत है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट की कुल 1325 पारियों में उन्होंने अविश्वसनीय 61760 रन बनाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम रिकॉर्ड 199 शतक है। सर जैक हॉब्स को प्रथम श्रेणी क्रिकेट का भगवान कहा जाता है।
“द मास्टर” के नाम से विख्यात जॉन बेरी हॉब्स कि महानता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यदि प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उनके करियर के कई साल खराब न हुए होते, और यदि शतक बनाने के बाद दूसरों को मौका देने के लिए खुद आउट होने की उनकी आदत नहीं होती, तो उनके क्रिकेट आंकड़े और भी अविश्वसनीय हो सकते थे।
क्रिकेट की दुनिया में उन्हें “The Master” के नाम से जाना जाता था। उन्होंने 50 की उम्र पूरी होने के बाद भी क्रिकेट खेलना जारी रखा। उनके करियर की खास बात यह रही कि उनके कुल शतकों में से आधे शतक तब आए जब उनकी आयु 40 वर्ष से पार जा चुकी थी।
वर्ष 1928-29 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 46 वर्ष की आयु में टेस्ट शतक जड़कर वह टेस्ट क्रिकेट इतिहास में शतक बनाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने, यह रिकॉर्ड आज तक बरकरार है।
क्रिकेट के प्रति उनके योगदान और विनम्र स्वभाव के कारण, वर्ष 1953 में उनको नाईटहुड (सर की उपाधि) दी गई, यह उपाधि पाने वाले वे दुनिया के इकलौते पेशेवर क्रिकेट बने।
सर जैक हॉब्स जीवन परिचय और संघर्ष
सर जैक हॉब्स जीवन परिचय संक्षिप्त में इस प्रकार है-
| पूरा नाम | जॉन बेरी हॉब्स (John Berry Hobbs) |
| जन्म | 16 दिसंबर 1882, कैंब्रिज (इंग्लैंड) |
| अन्य नाम | सर जैक हॉब्स |
| पिता का नाम | जॉन कूपर हॉब्स |
| बैटिंग स्टाइल | राइट हैंडबैट |
| बोलिंग स्टाइल | राइट आर्म मिडियम |
| डेब्यू | 01-07 जनवरी 1908 बनाम ऑस्ट्रेलिया |
| लास्ट मैच | 16-22 अगस्त, 1930 बनाम ऑस्ट्रेलिया |
| मृत्यु | 21 दिसंबर 1963 (81 वर्ष 5 दिन) |
Sir Jack Hobbs का जन्म 16 दिसंबर 1882 को कैंब्रिज के एक बहुत साधारण परिवार में हुआ था। वे अपने 12 भाई-बहिनों में सबसे बड़े थे। सर जैक हॉब्स के पिता कैंब्रिज के “फेनर्स” मैदान पर ग्राउंडमैन और पेशेवर अंपायर थे। क्रिकेट के माहौल में पले-बढ़े हॉब्स को बचपन से ही क्रिकेट में दिलचस्पी थी।
स्कूल की छुट्टियों के दौरान वे कॉलेज के कर्मचारियों के साथ टेनिस बॉल से, लकड़ी के स्टंप को बैट और टेनिस पोस्ट को विकेट बनाकर पथरीली जमीन पर क्रिकेट खेलते थे। एक स्टंप से बल्लेबाजी करने के कारण उन्होंने हमेशा सीधे बल्ले (Straight Bat) से खेलने का हुनर सीख लिया।
12 वर्ष की आयु में वह सेंट मैथ्यूज चर्च क्वायर टीम में शामिल हुए। Sir Jack Hobbs बचपन में महाराजा रणजीत सिंह की जादुई कलाई का खेल देखकर बहुत प्रभावित होते थे। सर जैक हॉब्स के आदर्श खिलाड़ी सरे के महान बल्लेबाज टॉम हेवर्ड (Tom Hayward) थे। जैक हॉब्स के दिल में सरे काउंटी के लिए खेलने का जबरदस्त जूनून था, इसके लिए वे सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करते थे।
Sir Jack Hobbs Cricket Career की शुरुआत
साल 1903 में हॉब्स की बल्लेबाजी से प्रभावित होकर टॉम हेवर्ड ने सिफारिश कर हॉब्स को सरे काउंटी से जुड़ने में मदद की। साल 1905 में हॉब्स ने पहली बार सरे के लिए आधिकारिक मैच खेला, इस मैच में उन्होंने पहली पारी में 18 रन जबकि दूसरी पारी में 88 रन बनाए।
उनकी बल्लेबाजी देखकर महान क्रिकेटर डब्लू जी ग्रेस ने कहा था “यह लड़का आगे चलकर बड़ा खिलाड़ी बनेगा”। ग्रेस का अनुमान सही साबित हुआ और उन्होंने अगले 20 सालों में ग्रेस के 126 शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
Sir Jack Hobbs का क्रिकेट करियर दो भागों (प्रथम विश्व युद्ध से पहले और बाद में) में बंटा हुआ था। प्रथम वर्ल्ड वार से पहले वे एक बेहद आक्रामक बल्लेबाज के रूप में जाने जाते थे लेकिन बाद में उन्होंने कलात्मक बल्लेबाजी को चुना था। प्रथम विश्व युद्ध के कारण कई सालों तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद 37 वर्ष की आयु में उनके क्रिकेट करियर की पुनः शुरुआत हुई थी।
इस दूसरे चरण में वो एक कलात्मक, शांत और संयमित बल्लेबाज के रूप में उभरे। वे इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के अलग-अलग पिचों पर एक समान बल्लेबाजी करते थे। हॉब्स तेज गेंदबाजों, स्पिन गेंदबाजों और स्विंग गेंदबाजों के सामने बहुत सहज रहते थे, वहीं दूसरी ओर अन्य बल्लेबाज अलग-अलग परिस्थितियों में परेशान हो जाते थे।
दक्षिण अफ्रीका के गूगली बॉलर्स के सामने अफ़्रीकी दौरे पर उन्होंने 67.37 के औसत से 539 रन बनाए, और साबित किया की वे एक महान बल्लेबाज है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट (Sir Jack Hobbs First Class Cricket Career)
हॉब्स की महानता की गवाही खुद उनके आंकड़े देते है, उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First Class Cricket) में 50.70 के शानदार औसत से रन बनाए, जो दर्शाता है कि उनकी बल्लेबाजी में कितनी निरंतरता थी। जैक हॉब्स ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 1325 पारियों में रनों की बरसात करते हुए 61760 रन बनाए।
उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रिकॉर्ड 199 शतक लगाए, यह एक विश्व रिकॉर्ड है। Sir Jack Hobbs ने अपने क्रिकेट करियर में 20 दोहरे शतक और 273 अर्धशतक जड़े। इन शानदार बल्लेबाजी आंकड़ों की वजह से उनको प्रथम श्रेणी क्रिकेट का भगवान कहा जाता है।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके आंकड़े इस प्रकार है-
| मैच | इनिंग्स | रन | औसत | 100 | 50 | 200 |
| 834 | 1325 | 61760 | 50.70 | 199 | 273 | 20 |
इतना ही नहीं, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 108 विकेट भी दर्ज है।
अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर (Sir Jack Hobbs International Cricket Career)
सर जैक हॉब्स ने साल 1908 में 1 जनवरी से 7 जनवरी के मध्य ऑस्ट्रेलिया के साथ खिलाफ अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। इंटरनेशनल क्रिकेट करियर में हॉब्स ने कुल 61 मैच खेले है। 61 मैचों की 102 पारियों में उनके नाम कुल 5410 रन दर्ज है।
उन्होंने अपना अंतिम इंटरनेशनल मैच भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1930 में खेला था। उनके नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक बनाने वाले सबसे उम्रदराज (46 वर्ष 82 दिन) खिलाड़ी का रिकॉर्ड दर्ज है।
इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके आंकड़े इस प्रकार है-
| मैच | इनिंग्स | रन | औसत | 100 | 50 | उच्चतम स्कोर |
| 61 | 102 | 5410 | 56.94 | 15 | 28 | 211 |
इंटरनेशनल क्रिकेट में हॉब्स के नाम 1 विकेट भी दर्ज है।
सर जैक हॉब्स स्टेट्स और रिकॉर्ड
Sir Jack Hobbs बैटिंग स्टेट्स इस प्रकार है-
| फॉर्मेट | मैच | इनिंग्स | रन | औसत | 100 |
| टेस्ट | 61 | 102 | 5410 | 56.94 | 15 |
| प्रथम श्रेणी | 834 | 1325 | 61760 | 50.70 | 199 |
Sir Jack Hobbs बॉलिंग स्टेट्स इस प्रकार है-
| फॉर्मेट | मैच | इनिंग्स | विकेट |
| टेस्ट | 61 | 102 | 01 |
| प्रथम श्रेणी | 834 | 1325 | 108 |
सर जैक हॉब्स के नाम दर्ज रिकार्ड्स इस प्रकार है-
[1]. इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज हॉब्स है, उन्होंने 46 वर्ष और 82 दिन की उम्र में शतक बनाया था।
[2]. वो दुनिया के 7 वें सबसे लम्बे इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी है, उनका करियर 22 वर्ष 233 दिनों का है।
[3]. वो टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 5000 रन (91 पारी) बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं।
[4]. उनके नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 199 शतक दर्ज है, ऐसा करने वाले वो दुनिया के इकलौते खिलाड़ी है।
[5]. उनके नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रिकॉर्ड 61760 रन दर्ज है।
सर जैक हॉब्स ने न केवल कलात्मक बल्लेबाजी को नया आयाम दिया, बल्कि क्रिकेट को हमेशा ईमानदारी, सादगी और विनम्रता के साथ खेला। उनके खेल और चरित्र के कारण द ओवल क्रिकेट स्टेडियम के मुख्य दरवाजों को “हॉब्स गेट्स” के नाम से जाना जाता है। सर जैक हॉब्स को हमेशा “द मास्टर” के नाम याद किया जाता है।
सवाल-जवाब
सर जैक हॉब्स क्यों प्रसिद्ध है?
जवाब- सर जैक हॉब्स को प्रथम श्रेणी क्रिकेट का भगवान कहा जाता है, उनके नाम 199 फर्स्ट क्लास शतक है।
सर जैक हॉब्स का उच्चतम स्कोर कितना है?
जवाब- हॉब्स का फर्स्ट क्लास में 316 * और इंटरनेशनल क्रिकेट में 211 उच्चतम स्कोर है।
जैक हॉब्स को “नाईट की उपाधि” कब दी गई?
जवाब- सर जैक हॉब्स को वर्ष 1953 में नाईट की उपाधि दी गई थी।
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