क्रिकेट का इतिहास मात्र एक खेल की कहानी नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों की वह लम्बी यात्रा है जिसे अनगिनत खिलाड़ियों, ऐतिहासिक मैदानों और यादगार पलों ने मिलकर संवारा है। क्रिकेट को पसंद करने वाले कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्रिकेट की उत्पत्ति कैसे हुई और इसके नियम कैसे बने? साथ ही लोगों में यह जिज्ञासा भी रहती हैं कि आखिर क्रिकेट दुनिया भर में इतना लोकप्रिय कैसे हुआ?
अगर आप इस खेल को गहराई से समझना और महसूस करना चाहते हैं, तो आपको क्रिकेट का इतिहास, उत्पत्ति और क्रिकेट के जनक के बारे में निचे दी गई जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए।
क्रिकेट क्या है?
क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें दो टीमें एक-दूसरे के खिलाफ रन बनाने और विकेट लेने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। मैच के दौरान पहली टीम बल्लेबाजी (Batting) करती है, जबकि दूसरी टीम क्षेत्ररक्षण (Fielding) और गेंदबाजी (Bowling) करती है। एक पारी (Innings) खत्म होने के बाद, दोनों टीमें अपनी भूमिकाएं बदल लेती हैं। अंत में निर्धारित ओवरों या क्रिकेट के नियमों के अनुसार जो टीम सबसे ज्यादा रन बनाती है, उसकी जीत होती है।
क्रिकेट को हिंदी में “गोल गट्टम लकड़ बग्घम दे दना दन प्रतियोगिता” या “लंब दंड गोल पिंड धर पकड़ प्रतियोगता” के नाम से जाना जाता है।
क्रिकेट के मुख्य फॉर्मेट:
क्रिकेट के मुख्यतः 3 फॉर्मेट है-
टेस्ट क्रिकेट (Test Cricket)– क्रिकेट इतिहास का यह सबसे पुराना फॉर्मेट है, यह मुख्यतया पाँच दिन का मैच होता है। टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट की आत्मा कहा जाता है।
वनडे फॉर्मेट (Odi Cricket)– यह 50 ओवर का होता है।
टी-20 क्रिकेट– जैसा की नाम से स्पष्ट है, यह 20 ओवर का खेल होता है।
आज के समय में टी-10 और हंड्रेड बॉल क्रिकेट जैसे प्रारूपों (Formats) का चलन भी हैं, यह भी बहुत तेजी के साथ लोकप्रिय हो रहे हैं।
क्रिकेट का इतिहास और उत्पत्ति (The History and Origins Of Cricket)
| प्रमुख तथ्य | विवरण |
| क्रिकेट का हिंदी नाम | गोल गट्टम लकड़ बग्घम दे दना दन प्रतियोगिता |
| शुरुआत | 16वीं शताब्दी |
| किस देश में उत्पत्ति हुई | इंग्लैंड (ग्रामीण) |
| आधिकारिक रूप से टेस्ट क्रिकेट का प्रारम्भ | वर्ष 1877, ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड |
| पहला इंटरनेशनल क्रिकेट मैच | वर्ष 1844, संयुक्त राज्य अमेरिका बनाम कनाडा |
16वीं शताब्दी के अंत में क्रिकेट की शुरुआत हुई थी। दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड की गलियों से निकला यह खेल प्रारम्भ में बच्चों का खेल था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता वयस्कों में भी तेजी से बढ़ी। 18वीं सदी में यह इंग्लैंड का राष्ट्रीय खेल बन गया। शुरुआत में क्रिकेट बैट आज के बैट से बिलकुल अलग था, इसका आकार हॉकी स्टिक की तरह मुड़ा हुआ था।
इंटरनेशनल स्तर पर इस खेल की पहुँच ब्रिटिश साम्राज्य के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ हुई। ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के परिणामस्वरूप यह खेल भारत, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज जैसे देशों तक पहुंचा।
क्रिकेट के इतिहास के सम्बन्ध में प्रथम लिखित सन्दर्भ 1597 ईस्वी में मिलता है। समय के साथ इस खेल ने अपनी पहचान बनाई और 17वीं और 18वीं सदी के बिच इंग्लैंड में यह बहुत लोकप्रिय हो गया।
क्रिकेट को संगठित रूप देने के लिए साल 1750 में हैम्बलडन (हैंपशायर) में पहला क्रिकेट क्लब बनाया गया. 1780 तक हैम्बलडन इंग्लैंड का सबसे चर्चित और लोकप्रिय क्रिकेट क्लब बन गया।
प्रारंभिक क्रिकेट का इतिहास
माना जाता है कि क्रिकेट का आविष्कार दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के विल्ड (Weald) क्षेत्र के रहने वाले बच्चों ने किया था। तब इस खेल को बॉल्स नाम से जाना जाता था, जहाँ बल्लेबाज का काम गेंद को लक्ष्य तक पहुँचने से रोकना था। साल 1611 में पहली बार इसे वयस्कों द्वारा खेले जाने का जिक्र मिलता हैं। उस समय काल की एक डिक्शनरी में क्रिकेट को “लड़कों का खेल” बताया गया था।
साल 1709 में पहली बार काउंटी के नाम पर क्रिकेट खेला गया। 17वीं शताब्दी के मध्य तक ग्रामीण क्षेत्रों में क्रिकेट काफी लोकप्रिय हो चूका था। इस शताब्दी के अंत तक क्रिकेट लंदन और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चूका था।
साल 1744 में पहली बार लिखित में क्रिकेट के नियम आए। महिला क्रिकेट का इतिहास साल 1745 में शुरू हुआ था, जब पहला ज्ञात क्रिकेट मैच सरे (Surrey) में खेला गया।
साल 1760 के आसपास गेंद को जमीन पर लुढ़काने के तरीके को बदला गया। उसके बाद गेंदबाजों द्वारा गेंद को पिच करने की शुरुआत हुई। तब से बल्लेबाज भी सीधे बैट (Bat) का इस्तेमाल करने लगे।
साल 1774 में पहली बार क्रिकेट के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया और एलबीडबल्यू , तीसरा स्टंप और बल्ले की चौड़ाई जैसे नियम जोड़े गए। इन नियमों को “स्टार एंड गार्टर क्लब” द्वारा बनाया गया था।
साल 1787 में क्रिकेट के नियम बनाने और उनको लागु करने के लिए “मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब” (MCC) की स्थापना हुई। ब्रिटिश उपनिवेशों के जरिए 17वीं शताब्दी के अंत में अमेरिका और 18वीं शताब्दी में भारत, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज तक पहुंचा।
क्रिकेट का उदय (19वीं सदी)
19वीं सदी वह दौर था जब क्रिकेट स्थानीय खेल से आगे निकलकर अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने में कामयाब हुआ। नेपोलियन युद्धों के बाद, 1839 में ससेक्स को पहला आधिकारिक क्रिकेट क्लब की मान्यता मिली।
इस सदी के अंत तक लगभग सभी काउंटी टीम बन चुकी थी। रेलवे नेटवर्क का विस्तार क्रिकेट के लिए वरदान साबित हुआ। रेलवे के विस्तार से दूर-दराज की टीमें एक दूसरे के साथ खेलने लगी, साथ ही दर्शकों के उत्साह और इस खेल की लोकप्रियता के चलते दर्शकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई। 1811 में पहला महिला काउंटी क्रिकेट मैच खेला गया।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पहला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच (International Cricket Match) 1844 में न्यूयॉर्क में कनाडा बनाम अमेरिका खेला गया था।
1864 में ओवरआर्म बोलिंग (हाथ ऊपर से घुमाकर फेंकना) को क़ानूनी तौर पर मान्यता मिली। इसी साल विश्व विख्यात विजडम पत्रिका (Wiseden) का प्रकाशन शुरू हुआ था। डब्लू. जी. ग्रेस ने क्रिकेट की लोकप्रियता को चार चाँद लगा दिए।
टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत 1877 में हुई थी, जब आधिकारिक तौर पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया था। साल 1882 में ऑस्ट्रेलिया की जीत के बाद प्रसिद्ध एशेज सीरीज (The Ashes) की शुरुआत हुई। 1889 में दक्षिण अफ्रीका टेस्ट खेलने वाला तीसरा देश बना।
1890 तक ऑस्ट्रेलिया में भी महिला टीमें बनने लगी। 1890 से लेकर प्रथम विश्व युद्ध तक के समय को क्रिकेट का स्वर्णिम काल कहा जाता है। इस दौरान रणजीतसिंह और विक्टर ट्रंपर जैसे महान खिलाड़ी उभरे। भारत में रणजी ट्रॉफी (घरेलु क्रिकेट) रणजीतसिंह के नाम पर ही खेली जाती है।
क्रिकेट की क्रांति (20वीं सदी)
क्रिकेट के विस्तार और आधुनिकीकरण की वजह से यह सदी क्रिकेट खेल के लिए किसी क्रांति से कम नहीं थी। सफेद कपड़ों से लेकर रंगीन कपड़ों तक और महीनों चलने वाले मैचों से लेकर कुछ घंटों तक का रोमांच, यह एक बहुत बड़ा बदलाव था। साल 1909 तक केवल इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ही इसके सदस्य थे।
इसके बाद वेस्टइंडीज (1928), न्यूजीलैंड (1930), भारत (1932), पाकिस्तान (1952), श्रीलंका (1982), जिम्बाब्वे (1992) और बांग्लादेश को साल 2000 में टेस्ट टीम का दर्जा मिला।
भारत-पाकिस्तान के साथ-साथ कई देशों में घरेलु क्रिकेट की शुरुआत भी इस दौरान हुई। भारत में साल 1934 में रणजी ट्रॉफी और पाकिस्तान में 1953 में कायदे-आजम ट्रॉफी की शुरुआत हुई।
महिला क्रिकेट का विकास भी इस सदी में शुरू हुआ था जब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमों के बिच 1934 में पहला टेस्ट मैच खेला गया। इतना ही नहीं शायद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पहला महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 1973 में खेला गया जबकि पुरुषों का पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप 1975 में हुआ था।
1960 के दशक में दर्शकों की घटती संख्या को देखते हुए क्रिकेट में सिमित ओवरों का एक नया फॉर्मेट शुरू किया गया, जिसे “वनडे क्रिकेट” के नाम से जाना जाता है। 1971 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में पहला वनडे मैच (एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय) खेला गया था।
1975 में पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप खेला गया, जिसे वेस्टइंडीज ने जीता था। 1992 के वर्ल्ड कप में पहली सफ़ेद गेंद, रंगीन जर्सी और फ्लड लाइट अस्तित्व में आई।
तकनीक की बात करें तो साल 1992 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज के दौरान पहली बार थर्ड अंपायर और टीवी रिप्ले का इस्तमाल किया गया।
तकनीक और टी-20 क्रिकेट का युग
साल 2001 में टेस्ट रैंकिंग और 2002 में वनडे रैंकिंग की शुरुआत हुई।
2003 में काउंटी क्रिकेट (इंग्लैंड) में पहली बार 20-20 ओवर का मैच खेला गया। इसकी लोकप्रियता से प्रेरित होकर साल 2005 में इंटरनेशनल स्तर पर पहली टी-20 मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच ईडन पार्क (ऑकलैंड) में खेला गया। क्रिकेट का यह छोटा प्रारूप बहुत पसंद किया गया।
इस प्रारूप ने ना सिर्फ दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया बल्कि खेल की गति ही बदल गई। बल्लेबाजों को 360 डिग्री शॉट खेलने के लिए प्रेरित किया गया।
साल 2007 में खेले गए प्रथम टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को जीत मिली और इस खेल को लोकप्रियता। इससे प्रेरित होकर भारत में 2008 में IPL जैसे प्राइवेट लीग की शुरुआत हुई। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि सभी देशों ने अपनी टी-20 लीग शुरू की। इस दौरान महिला टी-20 क्रिकेट भी बहुत तेजी से आगे बढ़ा।
साल 2017 में अफगानिस्तान और आयरलैंड को पूर्ण सदस्य का दर्जा मिला। टेस्ट क्रिकेट को रोचक बनाने के लिए पिंक बॉल और डे-नाईट टेस्ट मैच की शुरुआत हुई। टेस्ट क्रिकेट को रोमांचक बनाने के लिए एडिलेड में पहला डे-नाईट (पिंक बॉल) टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड खेला गया।
DRS (Decision Review System) की शुरुआत साल 2008 में भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई सीरीज से शुरू हुई। इसके अलावा फ्लेशिंग स्टंप्स, बॉल ट्रैकिंग और इंफ्रा रेड कैमरों ने अंपायरिंग को और अधिक सटीक बना दिया। इस सदी में ही बारिश से प्रभावित मैच में डकवर्थ लुइस नियम (DLS) लागु किया गया।
भारत में क्रिकेट का इतिहास (History Of Cricket In India)
भारत में क्रिकेट का इतिहास बहुत पुराना है, जो लगभग 300 साल पहले शुरू हुआ था। भारत में क्रिकेट की शुरुआत का पहला प्रमाण 1721 का मिलता है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नाविकों ने गुजरात के खंभात के तट पर मनोरंजन के लिए यह खेल खेला था। 1792 में बना कलकत्ता क्रिकेट क्लब दुनिया का दुसरा सबसे पुराना क्रिकेट क्लब माना जाता हैं।
भारत में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत
भारत में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की जड़े बहुत पुरानी हैं। साल 1864 में मद्रास (चेन्नई) और कलकत्ता (कोलकाता) के बिच पहला मुकाबला खेला गया था, इसकी गिनती भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे पुराने मैच में होती है। इस मैच का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
प्रथम आधिकारिक टेस्ट
टीम इंडिया ने पहला आधिकारिक टेस्ट मैच 25 जून 1932 के दिन इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स (Lords) में खेला था। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड को “क्रिकेट का मक्का” भी कहा जाता है। इस ऐतिहासिक मैच को देखने के लिए लगभग 24000 दर्शक मैदान में मौजूद थे, उस समय यह एक बहुत बड़ी संख्या थी। इस मैच में भारत के कप्तान सी. के. नायडू थे। इस मैच में भारत की हार हुई थी।
भारतीय क्रिकेट इतिहास का पहला टेस्ट मैच भारत 158 रनों के विशाल अंतर से हारा था। इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 259 रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में 275 रन। जब भारत बल्लेबाजी करने उतरा तो पहली और दूसरी पारी में क्रमशः 189 व 187 रन ही बना सका। इस तरह टीम इंडिया क्रिकेट इतिहास का प्रथम टेस्ट क्रिकेट मैच 158 रनों के विशाल अंतर से हार गया।
पहली पारी में कप्तानी पारी खेलते हुए सी.के. नायडू ने सबसे अधिक 40 रन बनाए जबकि दूसरी पारी में भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट मैच में पहला अर्धशतक लगाने वाले फ़ास्ट बॉलर अमर सिंह ने 51 रन की पारी खेली।
टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड के खिलाफ पहला शतक लाला अमरनाथ के नाम हैं। वर्ष 1933-34 में मुंबई में खेला गया यह मैच भारत में खेला गया पहला इंटरनेशनल टेस्ट क्रिकेट मैच था।
भारत की पहली जीत
इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने वर्ष 1951-52 में खेली गई टेस्ट सीरीज में अपना पहला मैच जीता था। विजय हजारे की कप्तानी में खेले गए इस टेस्ट मैच में भारत ने इंग्लैंड को पारी और 4 रन से हराया था।
भारत ने इंग्लैंड में पहला टेस्ट मैच अजित वाडेकर की कप्तानी में वर्ष 1971 में ओवल में जीता, जिसमें भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 4 विकेट से पराजित किया था। यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इसके बाद समय के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट का स्तर लगातार बढ़ता गया।
भारतीय क्रिकेट के ऐतिहासिक क्षण
- 1932 में टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत करने वाली टीम इंडिया को असली पहचान 1983 वर्ल्ड कप के बाद मिली। कपिल देव की कप्तानी में भारत ने वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया था। यह जीत भारतीय क्रिकेट का टर्निंग पॉइंट थी, इसके बाद क्रिकेट भारत के शहरों से लेकर गाँवों के घर-घर तक पहुँच गया।
- 2000 के दशक में भारतीय क्रिकेट के दादा सौरव गांगुली के नाम रहा, उन्होंने भारत को विदेशी जमीन पर जीतना सिखाया और टीम में एक नया आत्मविश्वास पैदा किया।
- 2007 के टी-20 विश्व-कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में जीत से वर्ल्ड क्रिकेट में भारत का डंका बजने लगा। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने ना सिर्फ 2 वर्ल्ड कप जीते बल्कि आईसीसी रैंकिंग में टीम को नंबर वन भी बनाया।
- साल 2008 में भारत में आईपीएल की शुरुआत हुई। इंडियन प्रीमियर लीग ने क्रिकेट की ग्लैमर और पैसे को बदल कर रख दिया। आईपीएल से भारतीय क्रिकेट को नया टैलेंट तो मिला ही साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बन गया।
- रणजी ट्रॉफी भारत का मुख्य घरेलु क्रिकेट प्रतियोगिता हैं।
भारतीय क्रिकेट की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
| उपलब्धि | साल | कप्तान |
| पहला टेस्ट मैच खेला | 1932 | सी. के. नायडू |
| पहली वर्ल्ड कप जीत | 1983 | कपिल देव |
| टी-20 चैंपियन | 2007 | महेंद्र सिंह धोनी |
| वनडे वर्ल्ड चैंपियन | 2011 | महेंद्र सिंह धोनी |
| दूसरा टी-20 वर्ल्ड कप | 2024 | रोहित शर्मा |
| तीसरा टी-20 वर्ल्ड कप | 2026 | सूर्यकुमार यादव |
क्रिकेट का जनक
विलियम गिल्बर्ट ग्रेस को क्रिकेट का जनक माना जाता है। ग्रेस 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड की ओर से क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी थे। विलियम गिल्बर्ट ग्रेस को “द डॉक्टर”, “द बिग अन”, “द ओल्डमैन” और “द चैंपियन” आदि उपनामों से भी जाना जाता है। क्रिकेट के जनक विलियम गिल्बर्ट ग्रेस का इंटरनेशनल क्रिकेट कैरियर वर्ष 1880 से 1899 तक माना जाता है।
इन 19 वर्ष के क्रिकेट कैरियर में विलियम गिल्बर्ट ग्रेस ने सन्यास के बाद भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना जारी रखा जो इनकी 60 वर्ष की आयु तक चलता रहा।
इन 43 वर्षों में विलियम गिल्बर्ट ग्रेस ने 44 प्रथम श्रेणी के टूर्नामेंट लगातार खेले। क्रिकेट के जनक कहे जाने वाले विलियम गिल्बर्ट ग्रेस राइट हैंड बल्लेबाज होने के साथ-साथ एक बेहतरीन गेंदबाज भी थे।
क्रिकेट का इतिहास (History Of Cricket In Hindi) उठाकर देखा जाए तो क्रिकेट के जनक विलियम गिल्बर्ट ग्रेस ने 870 मैचों 54000 से भी अधिक रन बनाए और 2800 से अधिक विकेट लिए थे, जो की आज के समय में अविश्वसनीय प्रतीत होता हैं।
IPL में सबसे ज्यादा हैट्रिक लेने वाले गेंदबाज
सवाल-जवाब
क्रिकेट की शुरुआत किसने की थी?
जवाब- 16वीं शताब्दी में क्रिकेट का आविष्कार दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के विल्ड (Weald) क्षेत्र के रहने वाले बच्चों ने किया था।
भारत में क्रिकेट के पिता कौन थे?
जवाब- भारत में रणजीतसिंह जी विभाजी जडेजा को क्रिकेट का पिता या जनक कहा जाता है।
क्रिकेट का खोजकर्ता कौन था?
जवाब- क्रिकेट की खोज दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के विल्ड क्षेत्र में रहने वाले बच्चों ने की थी।
भारत का पहला टी-20 कप्तान कौन था?
जवाब- वीरेंद्र सहवाग, भारत के पहले टी-20 कप्तान थे।
भारत में क्रिकेट की शुरुआत कब हुई थी?
जवाब- भारत में इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरुआत साल 1932 में हुई थी।
भारत ने पहला वर्ल्ड कप कब जीता और कप्तान कौन था?
जवाब- भारत ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में पहला वर्ल्ड कप जीता था।
“क्रिकेट का मक्का” किस मैदान को कहा जाता हैं?
जवाब- इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड को क्रिकेट का मक्का कहा जाता है।
क्रिकेट इतिहास का पहला अन्तर्राष्ट्रीय मैच किन देशों के बीच खेला गया था?
जवाब- अक्सर लोग समझते है कि पहला मैच इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था, लेकिन असल में पहला इंटरनेशनल मैच 1844 में अमेरिका बनाम कनाडा हुआ था।
टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में 10 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज कौन हैं?
जवाब- अनिल कुंबले ने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में खेले गए टेस्ट मैच में यह कारनामा किया था।
क्रिकेट में डॉल्स (Dolls) शब्द का क्या अर्थ है?
जवाब- प्राचीन समय में विकेट को डॉल्स कहा जाता था।
क्रिकेट के लिटिल मास्टर कौन है?
जवाब- सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर को लिटिल मास्टर के नाम से जाना जाता है।
क्रिकेट के बल्ले की अधिकतम चौड़ाई कितनी होती है?
जवाब- आईसीसी के नियमों के अनुसार, क्रिकेट के बल्ले की चौड़ाई 4.25 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए।