डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) या डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम एक गणितीय फॉर्मूला है, जिसका उपयोग सिमित ओवरों के क्रिकेट में (वनडे और टी-20) में किया जाता है। फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने मिलकर यह नियम बनाया था, बाद में स्टीवन स्टर्न ने इसमें बदलाब (अपडेट) किया था।
क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, इस खेल में बारिश सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है। जब बारिश की वजह से मैच में रुकावट आती है, तो दर्शकों और क्रिकेट के जानकारों के दिमाग में सबसे पहले यही सवाल आता है कि डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) के अनुसार जीत के लिए कितने रन चाहिए?
अधिकतर क्रिकेट फैंस के लिए DLS नियम एक पहेली जैसा है क्योंकि ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता है कि डकवर्थ-लुईस नियम क्या है? और DLS Method के अनुसार कैसे गणना करके, नया टारगेट सेट किया जाता है।
डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method)
DLS नियम क्रिकेट का एक वैज्ञानिक और गणितीय तरीका है। जिसका उपयोग बारिश या अन्य बाधाओं के कारण किसी भी सिमित ओवरों के क्रिकेट मैच में छोटे किए गए लक्ष्य (Target) निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
क्रिकेट मैच के दौरान बारिश या किसी अन्य बाधा के चलते मैच को रोकना पड़ता है। यह मैच जितने समय बाधित रहता है, उसको कवर करने के लिए मैच के ओवरों में कमी की जाती है लेकिन यदि मैच की दूसरी पारी (Second Innings) के दौरान मैच बाधित होता है, तो ओवरों के साथ-साथ नया लक्ष्य (Target) भी निर्धारित करना पड़ता है।
क्रिकेट में इस तरह बाधित मैच में जिस नियम के तहत ओवरों में कटौती और नए लक्ष्य का निर्धारण किया जाता हैं, वह डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) है।
आसान भाषा में यह भी कह सकते है कि “डकवर्थ-लुईस नियम या DLS नियम एक सांख्यिकीय पद्धति है, जो सिमित ओवरों के क्रिकेट मैच में दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए नया लक्ष्य तय करती है, जब मैच का समय खराब मौसम या किसी अन्य कारण से बर्बाद हो जाता है।
डकवर्थ-लुईस नियम क्यों बना?
DLS नियम के बनने की मुख्य वजह साल 1992 का वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच है, जो कि दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच खेला गया था।
मैच में क्या हुआ?
22 मार्च 1992 के दिन ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड का सेमीफाइनल मैच खेला गया। दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीता और पहले फील्डिंग चुनी। इंग्लैंड की टीम ने इस महत्वपूर्ण मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 45 ओवर में 6 विकेट खोकर 252 रन बनाए। जब साउथ अफ्रीका की टीम लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो 42.5 ओवर्स में 6 विकेट के नुकसान पर 232 रन बना लिए थे।
अब यहाँ से दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 13 बॉल पर 22 रनों की जरुरत थी। यह थोड़ा मुश्किल था लेकिन नामुमकिन नहीं। तभी मैच में बारिश आ गई और मैच को रोकना पड़ा। उस समय बारिश से बाधित मैच में Most Productive Overs Method का इस्तेमाल किया जाता था।
जब बारिश रुकी और सभी खिलाड़ी मैदान पर आए तो Most Productive Overs Method के तहत दक्षिण अफ्रीका का लक्ष्य संशोधित करके 1 गेंद पर 22 रन कर दिया गया ! अब आप ही बताओ क्या यह दक्षिण अफ्रीका के लिए न्याय था? बिलकुल नहीं, जीत के करीब पहुँचकर दक्षिण अफ्रीका को वर्ल्ड कप से बाहर होना पड़ा।
रेडियो कमेंट्री और DLS नियम का जन्म
दक्षिण अफ्रीका के लिए यह न्यायपूर्ण फैसला नहीं था। इस मैच की लाइव कमेंट्री फ्रैंक डकवर्थ सुन रहे थे, जो कि एक ब्रिटिश सांख्यिकीविद थे। उनको लगा कि यह कमजोर गणितीय गणना का परिणाम हैं। उन्होंने इस गणितीय गणना को हल करने का मन बनाया ताकि भविष्य में किसी टीम के साथ ऐसा अन्याय ना हो।
साल 1992 में फ्रैंक डकवर्थ ने रॉय स्टेटस्टिकल सोसायटी में एक शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसका टाइटल था “खराब मौसम में निष्पक्ष खेल“। इस काम में उनका साथ दिया यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट ऑफ इंग्लैंड के व्याख्याता टोनी लुईस ने। दोनों ने मिलकर इस काम को किया, तब से इस नियम को DL नियम के नाम से जाना जाने लगा।
ICC द्वारा DLS नियम को लागु करना
इस नियम को आईसीसी तक पहुँचाने का काम “इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड” ने किया। टोनी लुईस और फ्रैंक डकवर्थ खुश थे कि उनके बनाए नियम को खिलाड़ियों द्वारा स्वीकार कर लिया गया। अच्छी तरह से जाँच-परख करने के बाद Icc ने इस नियम को इंटरनेशनल क्रिकेट में लागु करने का मन बनाया।
साल 1997 में पहली बार इंग्लैंड बनाम ज़िम्बाब्वे के मैच में इस नियम को आजमाया गया। 1999 में इंग्लैंड में खेले गए वर्ल्ड कप में भी इस नियम को ट्रायल के तौर पर लागु किया गया था। साल 2001 में इसे औपचारिक रूप से मान्यता मिली थी लेकिन साल 2004 में यह नियम स्थाई रूप से अपना लिया गया।
DL से DLS कैसे बना?
शुरुआत में इस नियम को डकवर्थ-लुईस नाम से जाना जाता था, लेकिन समय के साथ इसमें अपडेट हुआ। साल 2014 में टोनी लुईस और फ्रैंक डकवर्थ के रिटायरमेंट के बाद इसकी जिम्मेदारी स्टीव स्टर्न को सौंपी गई। स्टीव स्टर्न ने इस नियम को अपडेट किया तब से यह नियम DLS नियम के नाम से जाना जाने लगा।
DLS नियम कैसे काम करता है?
DLS नियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी भी टीम के पास रन बनाने के लिए 2 मुख्य संसाधन होते हैं-
1. बचे हुए ओवर।
2. बचे हुए विकेट।
मैच में किसी भी तरह की रुकावट आने पर DLS नियम गणना करता है कि टीम के पास कितने संसाधन (Resources) बचे थे। अगर मैच दोबारा शुरू होने पर ओवर कम हो जाते हैं, तो संसाधनों की कमी के हिसाब से लक्ष्य को घटाया या बढ़ाया जाता है।
टीम 2 का पार स्कोर = टीम 1 का स्कोर *(टीम 2 के संसाधन/टीम 1 के संसाधन)
स्पष्टीकरण-
टीम 1 का स्कोर– पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम द्वारा बनाया गया कुल स्कोर।
टीम 2 का पार स्कोर– बारिश आने तक दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को उस पड़ाव पर जीत या ड्रा के लिए रन बनाने चाहिए थे।
संसाधन– बचे हुए ओवर और बचे हुए विकेट (Icc के पास एक मानक तालिका होती है जिसमें हर ओवर और विकेट गिरने पर संसाधनों का प्रतिशत दिया होता।
नोट- मैच की शुरुआत में संसाधन 100% होते हैं लेकिन जैसे-जैसे विकेट गिरते हैं या ओवर कम होते हैं, यह प्रतिशत कम होता जाता है।
उदहारण (DLS Method का पूरा गणित)
भारत बनाम पाकिस्तान वनडे मैच (काल्पनिक)
भारत पहली पारी- भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 300 रन बनाए। यहाँ भारत के पास पुरे संसाधन (100%) थे क्योंकि उन्होंने पुरे ओवर और पुरे विकेटों का इस्तेमाल किया।
पाकिस्तान की पारी– अब पाकिस्तान को जीत के लिए 301 रन चाहिए थे। लेकिन पाकिस्तान ने खेलना शुरू किया, बारिश आ गई और काफी समय बर्बाद हो गया।
अंपायर का फैसला– समय के अनुसार अंपायर ने कहा कि अब पाकिस्तान के पास 50 नहीं बल्कि 20 ओवर ही बचे हैं।
बिना DLS अगर पाकिस्तान को बोला जाए कि 20 ओवर में 301 रन बनाने है तो यह उचित नहीं है।
DLS के साथ- यह नियम देखता है कि पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 20 ओवर बचे है और 10 विकेट सुरक्षित है। DLS सॉफ्टवेयर गणना करता है कि इन संसाधनों के साथ पाकिस्तान का नया लक्ष्य क्या होना चाहिए।
पार स्कोर कैसे तय होगा? माना की DLS सॉफ्टवेयर ने बताया कि पाकिस्तान के पास सिर्फ 50% संसाधन बचे है।
अब गणना ऐसे होगी–
टीम 2 का पार स्कोर = टीम 1 का स्कोर *(टीम 2 के संसाधन/टीम 1 के संसाधन)
300 (50%/100%) =150
अब पाकिस्तान का नया टारगेट 20 ओवर में 151 रन होगा।
इस उदहारण से आप डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) को अच्छी तरह से समझ गए होंगे।
जरुरी बातें–
- डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) में विकेट बहुत कीमती होते है, अगर पाकिस्तान ने 10 ओवर में 80 रन बनाए है और एक भी विकेट नहीं गिरा है, तो उनका “पार स्कोर” कम होगा (मतलब वो जीत के करीब होंगे)
- अगर पाकिस्तान ने 10 ओवर में 80 रन बनाए हैं और साथ ही 5 विकेट भी खो दिए है तो उनका पार स्कोर भी बढ़ जाएगा।
- डकवर्थ-लुईस नियम (DLS Method) में ओवर से ज्यादा विकेट ज्यादा कीमती होते है। जितने ज्यादा विकेट आपके हाथ में होंगे, आपका लक्ष्य उतना ही आसान होगा।
क्रिकेट का इतिहास, उत्पत्ति, विकास और जनक
सवाल-जवाब
DLS नियम का फुल फॉर्म क्या है?
जवाब- DLS का फुल फॉर्म Duckworth-Lewis-Stern (डकवर्थ-लुईस-स्टर्न) है।
क्या DLS नियम बारिश होने पर ही लागु होता है?
जवाब- नहीं, यह नियम किसी भी बाधा (बारिश, फ्लडलाइट में खराबी या किसी भी वजह से मैच रुकना) के समय लागु किया जा सकता है, जिसकी वजह से ओवरों में कटौती करनी पड़े।
टी-20 में DLS नियम लागू करने के लिए कितने ओवर का खेल जरुरी है?
जवाब- टी-20 में DLS नियम लागू करने के लिए दोनों टीमों का कम से कम 5-5 ओवर खेलना जरुरी है।
वनडे में DLS नियम लागू करने के लिए कितने ओवर का खेल जरुरी है?
जवाब- वनडे (ODI) मैच में दोनों टीमों को कम से कम 20-20 ओवर खेलना अनिवार्य है।
क्या DLS नियम टेस्ट क्रिकेट में भी लागू होता है?
जवाब- नहीं, यह नियम टेस्ट क्रिकेट में लागू नहीं होता है। टेस्ट क्रिकेट में समय बर्बाद होने की दशा में ओवर कम करने की बजाए खेल का समय बढ़ा दिया जाता है।
DLS नियम में विकेट गिरने से लक्ष्य क्यों बढ़ जाता है?
जवाब- क्योंकि क्रिकेट में विकेट एक बहुत बड़ा संसाधन है। अगर किसी टीम के ज्यादा विकेट गिर जाते है, तो यह माना जाता है कि उनके पास रन बनाने की क्षमता कम हो गई है। इस लिए मैच में व्यवधान आने पर उनको मुश्किल टारगेट दिया जाता है।