IPL इम्पैक्ट प्लेयर नियम से ऑलराउंडर्स का करियर खतरे में हैं?

इम्पैक्ट प्लेयर नियम आईपीएल (IPL) का एक बेहद अनोखा नियम है। यह नियम टीमों को मैच के बीच में अपने किसी एक खिलाड़ी को बदलकर उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को मैदान पर उतारने की इजाजत (Permission) देता है। जिस तरह हॉकी या फुटबॉल में Substitute खिलाड़ी लाए जाते हैं, ठीक उसी तरह क्रिकेट (IPL) में भी खिलाड़ी बदला जा सकता है।

यह नियम आईपीएल में लागु होता है। इस नियम के तहत टॉस के समय कप्तान अतिरिक्त 5 खिलाड़ियों के नाम प्लेइंग-11 के साथ देता हैं। इन 5 अतिरिक्त खिलाड़ियों में से किसी एक को मैच की कंडीशन के हिसाब से इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम एक्सप्लेन

आपने ऊपर पढ़ा कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम क्या होता है। अब यहाँ पर इस नियम को अच्छी तरह से एक्सप्लेन किया जा रहा है।

यह नियम इन चार कंडीशन में लागु होता है

  • पारी (Innings) शुरू होने से पहले।
  • ओवर समाप्त होने के बाद।
  • विकेट गिरने पर। और
  • किसी भी बल्लेबाज के चोटिल होने पर।

यहाँ पर इस नियम में एक खास कंडीशन भी है “अगर किस ओवर के बीच में कोई विकेट गिर जाता है, तो नया इम्पैक्ट प्लेयर बल्लेबाजी करने तो आ सकता है, लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर उस ओवर की बची हुई गेंदें नहीं फेंक सकता है”।

कैसे काम करता है (उदाहरण द्वारा एक्सप्लेन)

उदाहरण स्वरूप कोई टीम पहले बल्लेबाजी (Batting) कर रही है, तो

  • पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम प्लेइंग-11 में एक बल्लेबाज को शामिल कर सकती है ताकि बड़ा स्कोर बनाया जा सके।
  • जब टीम की गेंदबाजी आएगी, तो कप्तान किसी भी बल्लेबाज को बाहर कर देगा जिसने बल्लेबाजी कर ली है और उसके स्थान पर किसी अच्छे गेंदबाज (5 अतिरिक्त खिलाड़ियों में शामिल) को ग्राउंड पर ले आएगा।
  • जिस खिलाड़ी को एक बार इस नियम के तहत बाहर कर दिया जाता है, वह फिर पुरे मैच में वापस नहीं खेल सकता है।

क्या इम्पैक्ट प्लेयर नियम से ऑलराउंडर्स का करियर खतरे में हैं?

यह सवाल हर क्रिकेट फैन और क्रिकेट खेलने (खास तौर पर ऑलराउंडर्स) के मन में कि इसका दूरगामी परिणाम क्या होगा? क्या आने वाले समय में क्रिकेट में ऑलराउंडर्स की कोई अहमियत नहीं रह जाएगी? या आने वाले समय में यह नियम इंटरनेशनल क्रिकेट में भी लागु होगा? इस नियम पर विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ी चिंता जता चुके है, यही वजह हैं कि क्रिकेट के गलियारों में यह नियम चर्चा का विषय बना हुआ है।

इन तमाम सवालों का जवाब आपको आगे मिलेगा-

पारंपरिक क्रिकेट की बात की जाए तो ऑलराउंडर खिलाड़ी टीम संतुलन में मुख्य भूमिका निभाता है। अगर टीम इंडिया अपनी प्लेइंग-11 में 7 बल्लेबाज और 5 गेंदबाज खिलाना चाहती है, तो ऐसे खिलाड़ी की जरुरत होगी जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी भी अच्छी कर सके। जैसे हार्दिक पांड्या या रविंद्र जडेजा।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम आने के बाद टीमें अब 11 की जगह 12 खिलाड़ियों का इस्तेमाल करती है। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम 8 मुख्य बल्लेबाज खिला लेती हैं, वही टीम बाद में गेंदबाजी के समय 1 स्पेशलिस्ट गेंदबाज को टीम में शामिल कर लेती। गेंदबाजी डिपार्टमेंट में भी टीम में 6 मुख्य गेंदबाज खेल रहे होते है।

अब सवाल यह उठता है कि जब किस टीम के पास 8 मुख्य बल्लेबाज और 6 विशेषज्ञ गेंदबाज उपलब्ध हैं, तो उनको किसी ऐसे खिलाड़ी की क्या जरुरत होगी जो थोड़ी बहुत बल्लेबाजी और थोड़ी बहुत गेंदबाजी कर सकता हो?

इस नियम पर फैक्ट्स और आंकड़े क्या कहते हैं?

जो युवा खिलाड़ी बतौर ऑलराउंडर्स टीम इंडिया में जगह बनाना चाहते है, उनके भविष्य का क्या होगा? इस पर आधारित आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो स्थिति और साफ हो जाएगी-

शिवम दुबे

शिवम दुबे टीम इंडिया के लिए एक महत्वपूर्ण ऑलराउंडर खिलाड़ी है। दुबे को टी-20 वर्ल्ड कप में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों करते देखा है। आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हुए उन्होंने खूब रन बनाए, मगर इम्पैक्ट प्लेयर नियम के चलते उनको गेंदबाजी का अवसर नहीं मिला।

क्योंकि कोई भी कप्तान किसी विशेषज्ञ गेंदबाज से गेंदबाजी करवाना चाहेगा। इसका असर यह हुआ कि शिवम दुबे अधिकतर मैचों में Substitute Batsman बनकर रह गए। आगामी टी-20 सीरीज या वर्ल्डकप की तैयारियों के लिए टीम इंडिया को एक ऐसे ऑलराउंडर की जरुरत होगी जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी भी करे, लेकिन आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में उनको गेंदबाजी करने का अवसर नहीं मिला।

वेंकटेश अय्यर

वेंकटेश अय्यर भी एक उभरते युवा खिलाड़ी है लेकिन आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उनको बतौर ओपनिंग बल्लेबाज इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में खिलाया। इन्होंने बल्लेबाजी तो अच्छी की लेकिन एक बड़े मंच पर गेंदबाजी का अवसर नहीं मिला।

ऑलराउंडर्स के ओवरों में गिरावट

इस नियम के लागु होने के बाद ऑलराउंडर्स द्वारा फेंके जाने वाले ओवर्स में काफी हद तक कमी आई है। पुरे मैच में 2 से 3 ओवर गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर्स को अब नहीं के बराबर गेंदबाजी करवाई जाती है। अनुमानित ऑलराउंडर्स के ओवर्स में लगभग 70% की गिरावट आई है, यह संकेत भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

क्या इम्पैक्ट प्लेयर नियम से भारतीय क्रिकेट को नुकसान हुआ है?

आईपीएल बेशक दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय क्रिकेट के लिए नए टैलेंट की खोज करना है। लेकिन इस नियम के आने के बाद भारतीय टीम को भविष्य में संभावित नुकसान हो सकता है:

एक समय था जब भारतीय टीम में युवराज सिंह, सुरेश रैना, वीरेंद्र सहवाग, पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और महान सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी पार्ट टाइम गेंदबाजी करके मैच का रुख पलट देते थे। इस नियम के आने के बाद कोई भी युवा बल्लेबाज आईपीएल को देखते हुए घरेलु क्रिकेट में भी गेंदबाजी करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे है।

क्योंकि वो जानते हैं कि अब टीम इंडिया का रास्ता आईपीएल से होते हुए जाता है। आज के समय में टी-20 क्रिकेट सबसे ज्यादा खेली जा रही है। ऐसे भी आप ही सोचिये कोई भी युवा बल्लेबाज गेंदबाजी का अभ्यास क्यों करेगा?

वर्तमान समय में भारतीय टीम में हार्दिक पांड्या के बैकअप के रूप में शिवम दुबे और नितीश कुमार रेड्डी को देखा जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि क्या इन दोनों ही युवा खिलाड़यों को गेंदबाजी के प्रयाप्त अवसर मिल रहे हैं? इसका सीधा सा जवाब है, नहीं।

एक समय था जब आईपीएल ऑलराउंडर्स के लिए बेहद शानदार मंच था लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर नियम के आने के बाद ऑलराउंडर्स का भविष्य खतरे में लगता है।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर भारतीय टीम के कई खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ भी अपनी राय प्रकट कर चुके है।

रोहित शर्मा की राय

भारतीय टीम के टी-20 वर्ल्डकप विजेता कप्तान और अपनी कप्तानी में मुंबई इंडियंस को पांच बार आईपीएल खिताब जीता चुके रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने एक पॉडकास्ट में कहा कि वो इम्पैक्ट प्लेयर नियम के फैन नहीं है। यह क्रिकेट को एंटरटेनिंग जरूर बना रहा है, लेकिन ऑलराउंडर्स का विकास रुक रहा है।

क्रिकेट ग्यारह खिलाड़ियों का खेल है, 12 का नहीं। शिवम दुबे और वाशिंगटन सुन्दर जैसे प्लेयर्स को गेंदबाजी नहीं मिल पा रही है, जो भारतीय क्रिकेट टीम के नजरिए से सही नहीं है।

विराट कोहली जैसे दिग्गज ने भी इसको सही नहीं ठहराया है।

इस नियम के आने के बाद आईपीएल में औसत स्कोर 200 के पार जा पहुंचा है और लगभग हर मैच में रनों बौछार हो रही है मगर जहां तक सवाल ऑलराउंडर्स का है, यह नियम उनके लिए एक धीमे जहर की तरह काम कर रहा है। यह नियम क्रिकेट खिलाड़ियों को ऑलराउंडर्स से “सिंगल-स्किल प्लेयर” बनने पर मजबूर कर रहा है।

पाठकों के लिए एक सवाल है क्या यह नियम वाकई में ऑलराउंडर्स के लिए सही नहीं हैं? अगर आप आईपीएल के सबसे सफल कप्तान और टीमों के बारे में जानना चाहते है, तो लिंक पर क्लिक कर पढ़ें।