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VVS Laxman and Rahul Dravid historic follow-on partnership Kolkata test 2001

फॉलो-ऑन (Follow-On) का नियम क्या है? टेस्ट मैच में लीड का पूरा गणित

September 27, 2026 by Ratan Gadri

क्रिकेट में फॉलो-ऑन (Follow-On) नियम का संबंध टेस्ट क्रिकेट या फर्स्ट क्लास क्रिकेट से है। टेस्ट क्रिकेट इस खेल का सबसे शुद्ध रूप है, क्रिकेट की शुरुआत भी इसी फॉर्मेट के साथ हुई थी। 5 दिनों तक चलने वाले इस खेल में कई ऐसे नियम हैं, जो मैच का रुख पूरी तरह से पलट सकते हैं।

इन्हीं नियमों में से एक बेहद महत्वपूर्ण और रोमांचक नियम है- फोलो-ऑन (Follow-On).

अक्सर क्रिकेट फैंस के मन में सवाल उठता है कि फॉलो-ऑन कब लागु होता है? किसी भी टीम के कप्तान को फॉलो-ऑन देने के लिए कितने रनों की लीड चाहिए? क्या 5 दिन, 4 दिन या 2 दिन के मैच में यह नियम बदल जाता है?

इन पेचीदा प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर जानने के लिए इस लेख में Follow-On Rules In Test Cricket और इसके पीछे का पूरा गणित समझेंगे।

Table of Contents

Toggle
  • फॉलो-ऑन (Follow-On) क्या होता है?
    • फॉलो-ऑन के लिए कितने रनों की लीड जरुरी है?
  • क्या फॉलो-ऑन देना अनिवार्य होता है?
  • क्रिकेट इतिहास का प्रसिद्ध फोलो-ऑन (Follow-On) मैच (कोलकाता टेस्ट 2001)
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
    • फोलो-ऑन (Follow-On) कब दिया जाता है?
    • क्या कप्तान के लिए फोलो-ऑन देना अनिवार्य है?
    • क्या वनडे या टी20 क्रिकेट में फोलो-ऑन का नियम होता है?
    • क्या फोलो-ऑन के बाद भी कोई टीम टेस्ट मैच जीत सकती है?

फॉलो-ऑन (Follow-On) क्या होता है?

पहली पारी में (1st Innings) में बल्लेबाजी करने वाली टीम सामने वाली टीम (विपक्षी टीम) पर पहली पारी के आधार पर एक निर्धारित सीमा से अधिक रनों की बढ़त (Lead) हासिल कर लेती है, तो पहली टीम के पास यह अधिकार होता है कि वह विरोधी टीम को तुरंत दोबारा बल्लेबाजी (2nd Innings) करने के लिए मैदान पर बुला सकती है।

सामान्य नियम के अनुसार, एक टीम पहली पारी खेलने के बाद अपनी दूसरी पारी खेलती है। लेकिन जब फॉलो-ऑन दिया जाता है, तो विरोधी टीम को लगातार दो पारियां (1st & 2nd Innings) खेलनी पड़ती हैं।

फॉलो-ऑन की परिभाषा– जब पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम बड़ा स्कोर बनाती है और दूसरी टीम को बहुत कम स्कोर पर समेत देती है, तो पहली टीम के पास यह विकल्प होता है कि वह दूसरी टीम को लगातार दूसरी बार बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर बुला सकती है। इसे ही फॉलो-ऑन देना या फॉलो-ऑन लागु करना कहते है।

टेस्ट या प्रथम श्रेणी क्रिकेट में जब पहली पारी में विशाल बढ़त मिलने पर कप्तान विरोधी टीम को अपनी दूसरी पारी में भी तुरंत खेलने के लिए आमंत्रित करता है, तो इसे फॉलो-ऑन देना कहते हैं।

फॉलो-ऑन के लिए कितने रनों की लीड जरुरी है?

MCC (Marylebone Cricket Club) के नियम 14 (Law 14- The Follow-On) के अनुसार, मैच के तय दिनों के आधार पर फॉलो-ऑन देने की न्यूनतम लीड तय होती है। टेस्ट मैच की अवधि के आधार पर न्यूनतम लीड पर आधार पर नीचे टेबल दी गई है-

मैच की अवधि (टेस्ट)जरुरी न्यूनतम लीड
5 दिन या उससे अधिक200 रन
3 या 4 दिन का मैच (प्रथम श्रेणी/डोमेस्टिक)150 रन
2 दिन का मैच100 रन
1 दिन का मैच75 रन

उदाहरण (Example)

6 जून 2026 को भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच खेला गया था। भारत ने पहली पारी में 564/8 (घोषित) रन बनाए और पारी घोषित कर दी।

अफगानिस्तान की टीम पहली पारी में 152 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारत को पहली पारी के आधार पर 412 रनों की विशाल बढ़त मिल गई, अब भारतीय कप्तान शुभमन गिल के पास 2 ऑप्शन थे- या तो टीम इंडिया वापस बल्लेबाजी करे या अफगानिस्तान को फॉलो-ऑन दिया जाए!

गिल ने दूसरा ऑप्शन चुना और अफगानिस्तान को फिर से बल्लेबाजी करनी पड़ी। क्योंकि यह 5 दिन का टेस्ट मैच था और भारत के पास 200+ की लीड थी।

फॉलो-ऑन (Follow-On) का टेक्निकल नियम

यह एक ऐसा टेक्निकल नियम है जिसके बारे में बहुत कम क्रिकेट प्रेमी जानते हैं। यदि 5 दिन के टेस्ट मैच का पहला दिन या पहले दो दिन खराब मौसम/बारिश के कारण बिना कोई गेंद फेंके रद्द हो जाते हैं, तो फॉलो-ऑन (Follow-On) के लिए जरुरी बढ़त (Lead) का नियम बदल जाता है।

पहला दिन रद्द हो जाए (4 दिन का खेल बचे): तो फॉलो-ऑन के लिए 200 की बजाए 150 (न्यूनतम) रनों की लीड जरुरी होगी।

यदि पहले दो दिन रद्द हो जाएं (3 दिन का खेल बचे): तब भी 150 रनों की बढ़त (Lead) चाहिए होगी।

यदि पहले तीन दिन रद्द हो जाएं (2 दिन का खेल बचे): तब फॉलो-ऑन के लिए 100 रनों की लीड चाहिए होगी।

जरुरी नोट (Important Note)- “यदि मैच शुरू होने के बाद खेल रुकता है, तो दिन कम होने पर भी लीड का नियम नहीं बदलता है। यह बदलाव केवल तब लागु होता है जब मैच के शुरूआती दिन पूरी तरह से रद्द हो जाएं”।

क्या फॉलो-ऑन देना अनिवार्य होता है?

नहीं ! किसी भी कप्तान के लिए फोलो-ऑन (Follow-On) लागु करना अनिवार्य नहीं है, यह एक वैकल्पिक अधिकार होता है।

उदाहरण के लिए मान लो किसी टीम को 300 रनों की लीड मिल गई, फिर भी कप्तान के सामने 2 विकल्प होते हैं-

1 विपक्षी टीम को फोलो-ऑन (Follow-On) देकर तुरंत दोबारा बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित करें या

2 खुद दोबारा बल्लेबाजी (2nd पारी) करने उतरें और विरोधी टीम को चौथी पारी में बड़ा लक्ष्य दें।

फोलो-ऑन (Follow-On) का फैसला पूरी तरह मैच की स्थिति और कप्तान की रणनीति पर निर्भर करता है।

फोलो-ऑन (Follow-On) देने के फायदे

फोलो-ऑन खेलने वाली टीम दबाव में होती है और उस टीम को दोबारा जल्दी आउट कर पारी से जीत हासिल की जा सकती है। मैच में बारिश का खतरा हो या समय कम बचा हो, तो फोलो-ऑन देकर मैच का परिणाम (Result) निकाला सकता है।

फोलो-ऑन न देने के कारण

यदि पहली पारी में गेंदबाजों ने ज्यादा गेंदबाजी की है, तो दोबारा गेंदबाजी से उनको थकान या चोट की सम्भावना रहती है। साथ ही अगर पिच टूट रही है और स्पिनर्स को मदद मिल रही, तो कप्तान खुद बल्लेबाजी करके 400+ का बड़ा लक्ष्य देना पसंद करते हैं, ताकि विरोधी टीम को चौथी पारी में बल्लेबाजी करनी पड़े।

क्रिकेट इतिहास का प्रसिद्ध फोलो-ऑन (Follow-On) मैच (कोलकाता टेस्ट 2001)

मैचभारत vs कोलकाता टेस्ट 2001
ऑस्ट्रेलिया पहली पारी445 रन
भारत पहली पारी171 रन
भारत दूसरी पारी657/7 घोषित
ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी212 रन
हार-जीतभारत फोलो-ऑन (Follow-On) के बाद भी जीता।

जब भी क्रिकेट में फोलो-ऑन (Follow-On) का जिक्र होता है, साल 2001 में भारत vs ऑस्ट्रेलिया का कोलकाता टेस्ट मैच चर्चा में आ जाता है। यह ऐतिहासिक टेस्ट मैच 11 मार्च 2001 को कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में खेला गया था।ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 445 रन बनाए, जवाब में भारतीय टीम 171 रनों पर ऑलआउट हो गई।

ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फोलो-ऑन दिया। भारत ने दूसरी पारी में 657/6 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया के सामने 384 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। भारत के लिए वीवीएस लक्ष्मण ने 281 रन और राहुल द्रविड़ ने 180 रनों के शानदार पारियां खेली।

ऑस्ट्रेलिया अपनी दूसरी पारी में 212 रन ही बना सका और भारत यह मैच 171 रनों के विशाल अंतर से जीत गया। भारत की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही फोलो-ऑन (Follow-On) भी चर्चा का विषय बन गया।

फोलो-ऑन (Follow-On) मिलने के बाद टेस्ट मैच जीतने का यह क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उदाहरण है।

CricFox.In के विचार

फोलो-ऑन का नियम टेस्ट क्रिकेट का एक बेहतरीन नियम है। यह टेस्ट क्रिकेट को अधिक रणनीतिक और रोमांचक बनाता है। यह जरुरी नियम नहीं है, यह कप्तान के विवेक पर निर्भर करता है कि फोलो-ऑन देना है या नहीं। निर्णय लेने से पहले कप्तान गेंदबाजों के वर्कलोड मैनेजमेंट का भी ध्यान रखते है।

यह भी पढ़ें: डकवर्थ-लुईस नियम क्या है? आसान भाषा में समझें DLS Method का पूरा गणित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

फोलो-ऑन (Follow-On) कब दिया जाता है?

5 दिन के इंटरनेशनल टेस्ट मैच में पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के पास विरोधी टीम पर कम से कम 200 रनों की बढ़त (Lead) होनी चाहिए।

क्या कप्तान के लिए फोलो-ऑन देना अनिवार्य है?

नहीं, फोलो-ऑन देना कप्तान के लिए अनिवार्य नहीं है। यह कप्तान का एक वैकल्पिक अधिकार होता है। कप्तान अपनी रणनीति और गेंदबाजों की थकान के आधार पर फोलो-ऑन (Follow-On) देने या खुद दोबारा बल्लेबाजी करने का फैसला ले सकता है।

क्या वनडे या टी20 क्रिकेट में फोलो-ऑन का नियम होता है?

नहीं, फोलो-ऑन (Follow-On) का नियम केवल टेस्ट मैच और प्रथम श्रेणी (First-Class) क्रिकेट में लागु होता है। सिमित ओवरों के क्रिकेट में यह नियम नहीं होता है।

क्या फोलो-ऑन के बाद भी कोई टीम टेस्ट मैच जीत सकती है?

हाँ, क्रिकेट इतिहास में अब तक 4 बार ऐसा हुआ है जब किसी टीम ने फोलो-ऑन मिलने के बाद भी टेस्ट मैच जीता है। इसका उदाहरण है 2001 का कोलकाता टेस्ट मैच, जहाँ भारत ने ऑस्ट्रेलिया से फोलो-ऑन मिलने के बाद भी 171 रनों की ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।

Categories क्रिकेट सीखो Tags Follow-On in Test Cricket, Follow-On Rules, Law 14 Follow On, फॉलो-ऑन (Follow-On) का नियम क्या है?, फॉलो-ऑन नियम की पूरी जानकारी
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