ड्रॉप-इन पिच क्या होती है? जानिए 4 आसान चरणों में इसकी पूरी प्रक्रिया | Drop-in Pitch

क्रिकेट में आपने सुना होगा कि मैच ड्रॉप-इन पिच पर खेला जा रहा। हाल ही में अमेरिका (टी20 वर्ल्ड कप 2024), न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में Drop-in Pitch का चलन काफी बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Drop-in Pitch क्या होती है और यह पारंपरिक पिच से कैसे अलग है?

यह पिच लगभग 22 से 24 मीटर लंबी, 3 मीटर चौड़ी और करीब 20 सेंटीमीटर गहरी (depth) एक भारी स्टील या धातु की ट्रे के अंदर बनाई जाती है। ड्रॉप-इन पिच तकनीक आने के बाद पिच को नुकसान पहुंचाए बिना एक ही स्टेडियम में कई खेलों का आयोजन किया जा सकता है।

इस लेख में ड्रॉप-इन पिच क्या है, इसको स्टील ट्रे में कैसे बनाया जाता है, ऑफ-साइट मिट्टी की तैयारी (Off-Site Soil Preparation) कैसे होती है और इसको मैच के दौरान स्टेडियम के अंदर कैसे इंस्टॉल किया जाता है आदि की विस्तृत जानकारी दी गई है।

ड्रॉप-इन पिच क्या होती है? (What is a Drop-in pitch)

ड्रॉप-इन पिच एक ऐसी क्रिकेट पिच होती है जिसे मैदान (Stadium) से दूर कहीं बाहर (ऑफ-साइट) तैयार किया जाता है और मैच से कुछ सप्ताह या महीने पहले स्टेडियम में फिट (Drop) कर दिया जाता है।

“ड्रॉप-इन पिच” की परिभाषा– एक ऐसी रेडीमेड क्रिकेट पिच जिसे मुख्य स्टेडियम से दूर किसी नर्सरी या खुले में तैयार किया जाता है और मैच से पहले विशेष मशीनों की मदद से मैदान के बीचों-बिच फिट (Drop) कर दिया जाता है, यह पिच ड्रॉप-इन पिच कहलाती है।

Crane installing a drop-in pitch inside a steel tray in a cricket stadium

ड्रॉप-इन पिच को बेहतरीन तरीके से समझने के लिए नीचे इसकी पारंपरिक पिच से तुलना की गई है, ताकि आसानी से समझा जा सकें-

ड्रॉप-इन पिच और पारंपरिक पिच में अंतर

अंतर का आधारपारंपरिक पिच (Traditional Pitch)ड्राप-इन पिच (Drop-in-pitch)
निर्माण स्थानमैदान के बीच में स्थायी रूप से बनी होती है।यह स्टेडियम के बाहर किसी नर्सरी या ऑफ-साइट स्थान पर तैयार किया जाता है।
संरचनायह मैदान की जमीन और मिट्टी पर बनी होती है। इसे एक मजबूत स्टील ट्रे या किसी धातु के ढांचे के अंदर तैयार किया जाता है।
फ्लेक्सिबिलिटीयह स्थायी होती है, आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया नहीं जा सकता है।इसे क्रेन और ट्रकों की मदद से आसानी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
स्टेडियम का उपयोगमुख्य रूप से इसका उपयोग क्रिकेट खेलने के लिए ही होता है।पिच हटाकर फुटबॉल, रग्बी या अन्य खेलों में किया जा सकता है।
रखरखावसाल भर रख-रखाव और सिंचाई करनी पड़ती है।मैच न होने की दशा में इसे बाहर ले जाकर नियंत्रित वातावरण में मेंटेन किया जाता है।
तैयारी का समयअधिक समय लगता है और मौसम का प्रभाव रहता है।यह बाहर तैयार होता है, इसमें कम समय लगता है।
लागत (Cost)अधिक खर्चा होता है।इसमें कम खर्च आता है।
उदाहरणलॉर्ड्स (लंदन), ईडन गार्डन्स (कोलकाता)मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) और नासाउ काउंटी स्टेडियम (न्यूयॉर्क)

ड्रॉप-इन पिच कैसे तैयार की जाती है?

Drop-In Pitch बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सटीक और वैज्ञानिक आधार पर आधारित होती है।

Drop-In Pitch बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और उपकरणों की लिस्ट इस तरह है-

मुख्य ढांचा (Structural Framework)स्टील ट्रे (Steel Tray) जिसकी लंबाई 25-30 मीटर और चौड़ाई 3 मीटर। ड्रेनेज पाइप व परफॉर टेड शीट्स।
मिट्टी और रेतउच्च क्ले वाली मिट्टी (50%-60% Clay), कंक्रीट/बजरी और बालू/रेत
घास और जैविक सामग्रीविशेष प्रकार की घास और उर्वरक व पोषक तत्व
उपकरण और इनस्टॉलेशन मशीनरीहाइड्रोलिक फ्लैटबेड ट्रेलर्स, हाई-कैपेसिटी क्रेन और पिच रोलर एवं कटर

ड्रॉप इन पिच बनाने की प्रक्रिया

चरण 1: स्टील ट्रे का ढांचा

Drop-in Pitch का आधार एक विशाल और मजबूत Steel Tray होती है। इसकी लंबाई 25 से 30 मीटर और चौड़ाई लगभग 3 मीटर होती है। इस ट्रे का मुख्य काम मिट्टी और घास को एक साथ बांधकर रखना है, ताकि जब भारी क्रेन से इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए उठाया जाए तो पिच में कोई दरार न पड़े।

इस स्टील ट्रे के तल (Bottom) में जल निकासी के लिए विशेष छेद और पाइप लगाए जाते है।

चरण 2: ऑफ-साइट मिट्टी और घास की तैयारी

किसी भी पिच के लिए सबसे जरुरी है मिट्टी और घास का सही मिश्रण। ड्रॉप-इन पिच के लिए उच्च क्ले (50-60%) वाली मिट्टी का उपयोग किया जाता है। सूखने के बाद यह मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे अच्छा उछाल (Bounce) और गति मिलती है।

स्टील ट्रे में सबसे नीचे कंक्रीट/बजरी (Gravel), उसके ऊपर बालू (Sand) और सबसे ऊपर विशेष मिट्टी की परत बिछाई जाती है। ऑफ साइट नर्सरी में विशेष प्रकार की घास जैसे Couch Grass उगाई जाती है। कटर और रोलर की मदद से इस मिट्टी में जड़ों को गहराई तक मजबूत किया जाता है।

इस प्रक्रिया में 6 महीने से लेकर 1 वर्ष तक का समय लगता है।

चरण 3: ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स

जब ऑफ-साइट मिट्टी की तैयारी पूरी हो जाती है और घास पूरी तरह से सेट हो जाती है, तब अगला चरण आता है इसको स्टेडियम में शिफ्ट करना। पिच को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए विशेष मल्टी-एक्सेल ट्रेलर्स और अधिक क्षमता वाली क्रेन का उपयोग किया जाता है।

पिच का वजह बहुत अधिक होता है (लगभग 50 से 100 टन) इसलिए सावधानी के साथ कम ट्रैफिक या रात के समय इसे स्टेडियम में पहुँचाया जाता है।

चरण 4: स्टेडियम में इंस्टॉलेशन

ड्रॉप इन पिच बनाने की अगली और महत्वपूर्ण कड़ी है बनाई गई पिच को स्टेडियम के आउटफील्ड के बीचों-बीच ठीक उसी साइज का एक गड्ढा खोदा जाता है। इसका आकार Drop-In Pitch के बराबर होता है, ताकि इस कृत्रिम पिच को इसके अंदर फिट किया जा सके।

क्रेन की सहायता से सावधानीपूर्वक स्टील ट्रे को उठाकर गड्ढे में फिक्स कर दिया जाता है। फिक्स करने के बाद अगला चरण ‘लेवलिंग और ब्लेंडिंग‘ का होता है। पिच के किनारों को मैदान की मुख्य घास जिसे Outfield के नाम से जाना जाता है, से इस तरह मिलाया जाता है कि पिच और मैदान एक जैसा लगने लगे।

इस तरह की पिच पर होने वाले मैच से 2-3 सप्ताह पहले क्यूरेटर पानी और रोलर का सही उपयोग कर पिच को अंतिम रूप देते है , इसे क्यूरेटिंग कहा जाता है। यह Drop-In Pitch बनाने की प्रक्रिया का अंतिम चरण है।

ड्रॉप-इन पिच के फायदे और चुनौतियाँ

Drop-In Pitches के कई फायदे भी है और साथ ही कई चुनौतियाँ भी है-

ड्रॉप-इन पिच के फायदे (Benefits of Drop-in Pitch)

1 मल्टी-पर्पज स्टेडियम

Drop-In Pitch का सबसे बड़ा तकनीकी फायदा यह है कि एक ही स्टेडियम को जरुरत के अनुसार अलग-अलग उद्देश्यों से काम में लिया जा सकता है। उदाहरण के लिए मान लो क्रिकेट मैच या सीजन खत्म होने के बाद क्रेन की मदद से पिच को सुरक्षित तरीके से हटा दिया जाता है। इसके बाद इस मैदान पर फुटबॉल या एथलेटिक्स खेलों का आयोजन किया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न क्रिकेट स्टेडियम में क्रिकेट के साथ-साथ सांस्कृतिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता रहता है। इस तरह के मैदानों पर अन्य म्यूजिक कॉन्सर्ट और इवेंट्स का आयोजन भी होता है।

2 आर्थिक लाभ

पारंपरिक क्रिकेट स्टेडियम में पिच के रखरखाव के कारण मैदान को लंबे समय तक बंद रखना पड़ता है। जबकि इसके विपरीत ड्रॉप इन पिचों वाले मैदानों पर अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के चलते मालिक अच्छी कमाई करते है।

मैदान के बीचों-बीच साल भर मेंटेन नहीं होने की वजह से रखरखाव की लागत कम आती है।

3 पिच का समान व्यवहार

इस तरह की पिचों पर गेंदबाज और बल्लेबाज दोनों को समान अवसर मिलता है क्योंकि ऑफ-साइट में तैयार होने के कारण पिच क्यूरेटर तापमान, मिट्टी का घनत्व और नमी को वैज्ञानिक मापदंडों पर सटीक नियंत्रित करते है।

4 क्रिकेट का विस्तार

जहाँ स्थायी क्रिकेट स्टेडियम नहीं हैं, वहाँ भी मेगा इवेंट्स कराए जा सकते हैं। जैसा कि टी20 वर्ल्ड कप 2024 में न्यू यॉर्क के नासाउ में ऑस्ट्रेलिया से ड्रॉप-इन पिच लाकर इंस्टॉल की गई थी।

5 खराब मौसम से सुरक्षा

क्योंकि इस तरह का पिच स्टेडियम के बाहर किसी ढके हुए या नियंत्रित ग्रीनहाउस वातावरण में रखा जा सकता है। इससे मौसम के कारण पिच खराब होने का जोखिम कम हो जाता है।

ड्रॉप-इन पिच की चुनौतियाँ

भारी मशीनों जैसे क्रेन, स्टील की ट्रे और ऑफ-साइट रखरखाव के कारण यह महँगी पड़ती है। प्रारंभ में इस तरह की पिचें बहुत सपाट मानी जाती थी, जिससे गेंदबाजों को मदद नहीं मिलती थी। हालाँकि अब इस तकनीक में सुधार हुआ है और पिच पर गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों के लिए समान अवसर रहते है।

Cricfox के विचार

ड्रॉप-इन पिच क्रिकेट खेल में एक नई क्रांति है। यह आधुनिक क्रिकेट और मल्टी-स्पोर्ट्स स्टेडियमों का भविष्य भी है। यह तकनीक थोड़ी महँगी हो सकती है लेकिन मैदान को अन्य खेलों या इवेंट्स के लिए भी उपलब्ध करवाती है। वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार के लिए Drop-In Pitch तकनीक गेम-चेंजर है।

यह भी पढ़ें: फास्ट बॉलर्स के लिए शिन स्प्लिंट्स और बैक स्पैज्म से बचाने के लिए गाइड।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

ड्रॉप-इन पिच क्या होती है? (What is Drop-in pitch in cricket?)

यह एक ऐसी क्रिकेट पिच होती है जिसे मुख्य स्टेडियम से दूर ऑफ-साइट तैयार किया जाता है और मैच से कुछ समय पहले क्रेन या ट्रकों की मदद से लाकर मैदान में फिट कर दिया जाता है।

ड्रॉप इन पिच और पारंपरिक पिच में क्या अंतर है?

पारंपरिक पिच मैदान के बीचों-बीच स्थायी रूप से बनी होती है, जबकि ड्रॉप इन पिच पोर्टेबल होती है। इसे मैच के बाद हटाकर स्टेडियम का इस्तेमाल अन्य खेलों या इवेंट्स के लिए किया जा सकता है।

Drop-in pitch का वजन कितना होता है?

पूर्ण रूप से तैयार Drop-in pitch (स्टील ट्रे और मिट्टी के साथ) का वजन लगभग 40 से 100 टन तक हो सकता है।

Drop-in pitch को स्टेडियम में कैसे लगाया जाता है?

इसे मल्टी-एक्सल ट्रेलर्स की मदद से लाया जाता है और भारी क्षमता वाली क्रेन की मदद से स्टेडियम के मैदान में खोदे गए गड्ढे में फिट कर दिया जाता है।

ड्रॉप-इन पिच पर किसको मदद मिलती है?

शुरुआत में एक समान उछाल व गति मिलती है। हालाँकि सही तरीके से क्यूरेट न करने पर यह सपाट भी हो सकती है, जिससे बल्लेबाजों के लिए आसानी रहती है।

T20 वर्ल्ड कप में न्यू यॉर्क के स्टेडियम में ड्रॉप-इन पिच क्यों इस्तेमाल की गई थी?

न्यू यॉर्क (नासाउ काउंटी) में कोई स्थायी क्रिकेट स्टेडियम नहीं था। इसलिए वहां ऑस्ट्रेलिया से तैयार Drop-in pitch लाकर अस्थायी स्टेडियम में इंस्टॉल की गई थीं।

Drop-in pitches का उपयोग किन-किन स्टेडियमों में होता है?

मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) और ईडन पार्क (न्यूजीलैंड) इसके उदाहरण है।